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  • २०८२ फाल्गुन २६ | Tue, 10 Mar 2026
  • नै पाइन, नै रोपनी

    नै पाइन, नै रोपनी

    महोत्तरी, १७ अखारः समयमे वर्षा नै होबाक कारणेँ जिलामे धान रोपनी कम भेल अइछ। मध्य अखार बीत रहलोपर तैयार बीया तथा पाइनके अभावक कारणें रोपनी कम भेल अइछ। जिलामे कुल खेती योग्य जमीन लगभग ७१ हजार हेक्टर अइछ, जाहिमे ४५ सँ ५० हजार हेक्टरधैर धानके खेती भ रहल अइछ।

    मुदा एहि बेर अनुकूल वर्षा नै भेलासँ बिरार छिटैमे देरी भेल आ रोपनीक लेल पाइन नै भेलासँ खेती पछुआइत गेल जानकारी कृषि ज्ञान केन्द्र देलक अइछ। “अनुकूल वर्षा नै होबाक कारणेंँ किसान समयमे बिरार नै छिट सकल, आब रोपनी करबाक समय आएल छै तँ पाइन नै भ रहल अइछ, ताहिसँ रोपनी कम भेल अइछ”, कार्यालय प्रमुख आ वरिष्ठ कृषि अधिकृत देवानन्द यादव कहलैन। सामान्य रूपसँ महोत्तरी आ मधेश क्षेत्रक किसानसभ जेठक तेसर सप्ताहधैर बिरार छिटने रहैत छल आ अखार महिना भितर रोपनी पूरा क लैत छल। मुदा एहि अखार १५के धान दिवस मनाएल जा रहल समयमे रोपनी दू-तीन प्रतिशतके करिब मात्रे भेल अइछ, यादव बतौलैन।

    जिलाक कुल खेती योग्य जमीनमे मात्र १० प्रतिशत क्षेत्रमे नहरसँ सिँचाइ सुविधा उपलब्ध छै। एहि बेर लम्बा रौदीसँ नालीकेँ पाइनक स्रोत सूइख गेल अइछ, जाहिसँ जमीनपर रोपानी कम भेल अइछ।

    भङ्गाहा–५, भूचक्रपुरक किसान लक्ष्मण महतो कहलैन, “सरकार वैकल्पिक सिँचाइक लेल इनार, बोरिङ, ट्युबवेल जकाँ योजना तथा बीया, मलखाद आ प्रविधि किसानधैर पहुँचाएत तँ खेती-पातीमे किसानक उत्साह जरूर बढ़त।”

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